~राजकमल पांडे की रिपोर्ट
1 हजार पेड़ काट कर 1 लाख पेड़ (वृक्षारोपण) का दावा कितना सच और कितना झूठ
अनूपपुर।
देश के किसी भी हिस्से में जब विकास की बात आती है, तो सर्वप्रथम संकट देश के उन हिस्सों पर बेहद प्रभाव पड़ता जहाँ जल, जंगल और जमीन बचाव का नारा सरकार जोर शोर से बुलंद करती है।
इसी से जुड़े कुछ डाटा प्रस्तुत है
जंगल वन भूमि का हस्तांतरण सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले 10 वर्षों (2014-2024) में विकास के लिए एक बड़े वन क्षेत्र का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए किया गया है।
(i) कुल क्षेत्रफल: लगभग 1,73,396 हेक्टेयर (1,734 वर्ग किमी) वन भूमि को डायवर्ट किया गया है।
(ii) प्रमुख कारण इसमें सबसे बड़ा हिस्सा खनन, सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं और बिजली लाइनों का है।
इसमें सर्वाधिक प्रभावित राज्य: आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में सबसे अधिक वन भूमि विकास कार्यों के लिए दी गई है।
“सरकार का कहना है कि इसके बदले ‘क्षतिपूरक वनीकरण’ किया जाता है।”
‘हालांकि पर्यावरणविदों का मानना है कि नए लगाए गए पेड़ पुराने प्राकृतिक जंगलों की पारिस्थितिकी की बराबरी नहीं कर सकते। यानि न्यूजोन प्राइवेट लिमिटेड 1 हजार वृक्ष काट कर 1 लाख पेड़ (वृक्षारोपण) का दावा स्वविवेक से लिया गया निर्णय ही है इसमें किसी पर्यावरण विद का स्पष्ट दखल नहीं है और ना हि कोई सुझाव प्रस्तुत किया गया है। जाहिर है कि जब 1 हजार पेड़ काटे जाएंगे तो क्षेत्र का ऑक्सीजन लेबल गिरेगा और इसका सीधा प्रभाव आसपास के 10 से 15 किलोमीटर का क्षेत्र पूर्णतः प्रभावित होगा। साथ ही न्यूजोन प्राइवेट लिमिटेड 1 हजार पेड़ काट कर अगर हैदराबाद और बॉम्बे में 1 लाख वृक्षारोपण कार्य करेंगे तो अनूपपुर जिले का ऑक्सीजन लेबल पूरी तरह चरमरा जाएगा। मतलब न्यूजोन प्राइवेट लिमिटेड की इस विनाश लीला के चपेट में अनूपपुर का शहरीय क्षेत्र पूर्णतः प्रभावित होगा। फिर इस पर न्यू जोन का यह कहना कि 1 हजार पेड़ काट कर 1 लाख लगाए जाएंगे की पूर्व परिस्थितिक पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इस पर भी स्पष्ट प्रकाश डालना चाहिए था।’
जमीन- भूमि क्षरण और उपयोग में बदलाव
विकास और औद्योगीकरण का सीधा असर कृषि और सामुदायिक भूमि पर पड़ता है। औद्योगिक गलियारे और बुनियादी ढांचा, नेशनल हाईवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण हुआ है। भूमि क्षरण नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लगभग 29% जमीन किसी न किसी रूप में क्षरण का शिकार है। खनन गतिविधियों ने मिट्टी की उर्वरता और संरचना को गहराई से प्रभावित किया है। आदिवासी और स्थानीय अधिकार: ‘जमीन’ से जुड़ा एक बड़ा पहलू विस्थापन भी है। इस हिसाब से देखा जाए तो आने वाले दिनों में अनूपपुर व आसपास के खेती और किसानी इलाकों को प्राइवेट कंपनी और सरकार का गठजोड़ प्रभावित करेंगे। तथा कई क्षेत्रों में बांधों और खनन के कारण स्थानीय समुदायों को अपनी पैतृक जमीन छोड़ना पड़ा ही है। और अब यही हाल रक्सा, कोलमी व इसके पूर्व मोजर बेयर पॉवर प्लांट में देखने को मिला है। इससे जाहिर होता है कि आने वाले 10 से 12 सालों में अनूपपुर, दिल्ली जैसे दूषित वातावरण के चपेट में आने के लगभग दहलीज में खड़ा है। और प्रदेश सरकार ऐसे विकास के आड़ में हो रहे विनाश लीला को दर्शकदीर्घा से देख रही है। और न्यूजोन प्राइवेट पॉवर लिमिटेड जिस CSR का हवाला दे रही है वही CSR रिपोर्ट अगर मोजर बेयर पॉवर प्लांट के उठा कर देखें जाएं तो सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

जल
जलस्रोतों पर दबाव शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार ने जल संसाधनों की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों को प्रभावित किया है। नदियों का प्रदूषण: गंगा और यमुना जैसी बड़ी नदियों के पुनरुद्धार के प्रयासों के बावजूद, औद्योगिक कचरे और शहरी सीवेज का दबाव आज भी बना हुआ है। लेकिन रक्सा, कोलमी यह परिस्थिति न्यू जोन प्रोजेक्ट के अनुकूल रहेगी इसका दावा निर्माण शुरू होते ही धरातल पर आएगी। भूजल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दौरान भारी निर्माण कार्य और वनों की कटाई से भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया बाधित होगी है, जिससे कई क्षेत्रों में जल स्तर नीचे गिरेगा। साथ ही सर पर गर्मी का मौसम आ रहा है, ऐसे में आसपास के गाँव, नगर इससे प्रभावित नहीं होंगे यह कहा नहीं जा सकता। तथा इसके पहले मोजर बेयर ने भी निर्माण के पूर्व कई लाख पेड़ो का वृक्षारोपण किए जाने का दावा तो किया था लेकिन जमीनी हकीकत देखने में कुछ है व यहाँ तक की बेहतर सड़क और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का दावा करने वाला मोजर बेयर पॉवर प्लांट भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूर्ण करते ही भूल गए और कई गाँवों को दूषित वातावरण में धकेल दिया है। कंपनी ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास, पेयजल आपूर्ति, सड़क एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु दीर्घकालिक योजनाएं लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। कंपनी प्रबंधन ने कहा कि स्थानीय समुदाय के साथ सहभागिता और विश्वास के आधार पर ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। जनसुनवाई संवाद, पारदर्शिता और आपसी विश्वास का सशक्त उदाहरण है। पर्यावरण संरक्षण जनसुनवाई में यह प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट पर्यावरणीय संतुलन, नियामकीय अनुपालन और स्थानीय सहभागिता के साथ अनूपपुर जिले को ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन और सतत औद्योगिक विकास की नई दिशा प्रदान करेगा।













