April 17, 2026 4:35 pm

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कलेक्टर कार्यालय के जारी निर्देश की अवहेलना करते अनूपपुर तहसीलदार, 45 दिवस बीत जाने के बाद भी जानकारी उपलब्ध कराने में असक्षम विभाग

अनूपपुर।

भाजपा शासन में यह लगा था कि प्रदेश की जनता न्याय की आस में सांस लेगी लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं पड़ रहा है। बल्कि यहाँ हो उल्टा रहा है और बड़े ओहदे की अधिकारियों के लिखित निर्देश का पालन करने में नीचे के अधिकारी टालमटोल करते देखें जाते हैं। और जनता तहसील से लेकर कलेक्ट्रेट और कलेक्ट्रेट कार्यालय से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

आवेदक ने 3 बिन्दुओ की चाही थी जानकारी

बीती दिनांक 11 नवंबर 2025 को आवेदक के द्वारा 3 बिन्दुओ की जानकारी चाही गई थी जिसे कलेक्टर कार्यालय से दिनांक 12 नवंबर 2025 को लोक सूचना अधिकारी (तहसीलदार अनूपपुर) को पत्र लिखते हुए यह निर्देश दिए गए कि चाही गई जानकारी आपके विभाग/कार्यालय से सम्बन्धित होने कारण आवेदन आपके विभाग की ओर भेजा जा रहा है। आवेदक को चाही गई वांछित जानकारी समय सीमा में नियमानुसार उपलब्ध कराएं। लेकिन 2 माह बीत जाने के बाद भी तहसीलदार ने कलेक्टर कार्यालय के जारी पत्र का न तो कोई जबाब दिया और न हि आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराई जा सकी। इससे यह मालूम होता है कि कलेक्टर कार्यालय के जारी पत्र के निर्देश अनूपपुर तहसीलदार के लिए महज कोरा पत्र ही दिख रहा है। जिसके परिणामस्वरुप कलेक्टर कार्यालय के निर्देश ठंडे बस्ते में हैं।

आरटीआई के उद्देश्यो को ठेंगा दिखाते तहसीलदार

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 भारत में लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार और सरकारी संस्थानों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है। लेकिन आरटीआई शासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य को खुलेआम अनूपपुर तहसीलदार ठेंगा दिखा रहे हैं। बावजूद इसके कि इसका सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी कामकाज “बंद कमरों” के बजाय जनता की नजरों के सामने हो। नागरिकों को यह जानने का हक है कि सरकार क्या निर्णय ले रही है और क्यों। जवाबदेही तय करना आरटीआई के माध्यम से सरकारी अधिकारी अपने कार्यों और निर्णयों के लिए सीधे जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। यदि कोई काम समय पर नहीं होता या उसमें अनियमितता होती है, तो नागरिक सवाल पूछ सकते हैं।

आरटीआई की वास्तविक भावना को साकार करने में रोड़ा बने तहसीलदार

एक जीवंत लोकतंत्र के लिए जागरूक नागरिक अनिवार्य हैं। आरटीआई यह सुनिश्चित करता है कि जनता को शासन की नीतियों की जानकारी हो, ताकि वे सोच-समझकर अपनी राय बना सकें। लेकिन अनूपपुर जिले में चल रही खुलेआम भर्रेशाही और नियम कानूनों पर पलीता लगाते विभागीय अधिकारी शासन और लोकतंत्र की नीति और क़ानून व्यवस्था पर स्वयं रोड़ा बने बैठे हैं।

जनसुनवाई में सबसे ज्यादा शिकायत राजस्व विभाग का

प्रदेश सरकार की नीति के अनुरूप कार्य हो इसके लिए प्रत्येक मंगलवार जनसुनवाई रखी गई है। लेकिन प्रति मंगलवार अनूपपुर कलेक्ट्रेट में लम्बी कतारों में सबसे ज्यादा शिकायत राजस्व विभाग के रहते हैं। कभी कभी जिलादंडाधिकारी भी माथा पकड़ बैठ जाते हैं। बावजूद मध्यप्रदेश में प्रति मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय और अन्य सरकारी विभागों में आयोजित होने वाली ‘जनसुनवाई’ का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना और आम नागरिक की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है। इस व्यवस्था के पीछे के प्रमुख उद्देश्य शासन और जनता के बीच सीधा संवाद है जनसुनवाई का सबसे बड़ा लक्ष्य यह है कि आम आदमी को अपनी बात कहने के लिए किसी बिचौलिए की जरूरत न पड़े। नागरिक सीधे जिले के सर्वोच्च अधिकारी (कलेक्टर) के सामने अपनी पीड़ा रख सकते हैं। यह जनता के स्वाभिमान को बनाए रखने की एक पहल है, जहाँ उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय एक निश्चित दिन और समय पर सम्मानपूर्वक सुना जाता है। लेकिन कलेक्टर कार्यालय के आदेश और निर्देश को राजस्व विभाग खुला माख़ौल उड़ाते देखें जा रहे हैं। क्योंकि एक कलेक्टर निर्देश देते हैं और दूसरे तहसील कार्यालय निर्देश सुनकर मामला ठंडे बस्ते में इस उद्देश्य से डाल देते हैं कि जब लिखित आदेश आएगा तो एक्शन लिया जाएगा। इधर समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हो पाता है बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पल्ला झाड कर बैठ जाते हैं। इसके अतिरिक्त अनूपपुर तहसील कार्यालय में बाबूओं की नादिरशाही इस हद तक चरम में है कि लोक सेवा केंद्र में लगाए गए आवेदन की कॉपी लोक सेवा केंद्र में भेजनें हेतु आवेदको से ही फोटो कॉपी का पैसा वसूला जा रहा है।

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