अनूपपुर।
एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का ढिंढोरा पीट रही है, तो दूसरी तरफ स्कूल में शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने कि जगह पर मजदूर बनाने का कृत्य करते देखे जा रहे हैं। इन तस्वीरों को देखकर कहेंगे कि हां अब यही देखना बाकी रह गया था, मामला ग्राम पंचायत सकरा के शासकीय प्राथमिक विद्यालय खैरखुँडी का है जब विद्यालय पहुंचा गया तो मैडम ठेकेदार की भांति कुर्सी पर बैठकर स्कूल के छात्र-छात्राओं को फावड़ा देकर स्कूल प्रांगण की सफाई करवा रही थी जो कैमरे में कैद हो गया पूछने पर कहती हैं कि मैं गणतंत्र दिवस की तैयारी करवा रही थी। मध्य प्रदेश सरकार ‘सीएम राइज’ जैसे स्कूलों के माध्यम से ग्रामीण बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं अनूपपुर जिले के सरकारी स्कूलों से आने वाली तस्वीरें दावों की पोल खोल रही हैं। ग्राम पंचायत सकरा के शासकीय प्राथमिक विद्यालय खैरखुँडी में शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप उठे थोड़ी देर बाद प्राथमिक विद्यालय प्रभारी का आगमन हुआ जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया मैं काम नहीं करवा रहा था। “आप अपने कैमरे में कैद कर लिए हैं।” यह शब्द किसी और के नहीं बल्कि प्राथमिक विद्यालय प्रभारी दीप नारायण मिश्रा के थे जिनके कंधों पर शिक्षा के मंदिर में बच्चों के सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा रही है। लेकिन शिक्षक बच्चों को मजदूर बनाना चाहते हैं, जबकि मंचों से शासन और प्रशासन के मुखिया कहते हैं मेरे बच्चों पढ़-लिखकर तुम एक दिन अच्छे मुकाम तक पहुंचना, तुम्हारे शिक्षा और दीक्षा के लिए सरकार व्यवस्था कर रही है। लेकिन दूसरे तरफ की तस्वीरें कुछ और भी बयां कर रही है, यह बड़ी विडंबना से कहना पड़ रहा है कि जिस तरह से गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को शिक्षित करने तथा बेहतर जिंदगी बनाने के लिए मेहनत करके स्कूल भेजता है ठीक उसी तरह इन शिक्षकों के माता पिता ने भी मेहनत मजदूरी करके उन्हें भी शिक्षित किया होगा तब जा के वह आज स्कूल में शिक्षक बने हैं और अभिभावक अपने बच्चों के सुनहरा भविष्य ऐसे शिक्षको के हाथों में सौंप दिया है जिनसे शिक्षक कुर्सी में बैठ कर बच्चों के हाथ में कन्नी, फावड़ा तथा झाड़ू रखा कर शाला प्रांगण की साफ सफाई करवा रहे थे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
बीआरसी जैतहरी, विष्णु प्रसाद मिश्रा से इस मामले में संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फ़ोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
डीपीसी अनूपपुर जिले के जिम्मेदार अधिकारी आशुतोष कुशवाहा डीपीसी ने भी फोन नहीं उठाया।
विभाग की चुप्पी
ऐसे मामले पर जब अधिकारी ही चुप हों तो व्यवस्था को सुस्त होने में देरी नहीं लगता है, अब देखना होगा कि अधिकारी खबर प्रकाशित होने के बाद जागते हैं या फिर कुंभकर्ण की नींद में सोए रहेंगे। क्योंकि पहले भी खबरें प्रकाशित होने पर अधिकारियों ने कार्रवाई करने कि जगह अभयदान दिया हुआ था। जिसके परिणामस्वरूप हालत और बद से बदतर हो गए हैं।












