“जान दे देंगे पर जमीन नहीं देंगे” जमीन हमारी हीरा है, इसे छीनने नहीं देंगे”
शोभापुर बांध के विरोध में उतरा जनसैलाब, विस्थापन के खिलाफ आर-पार की जंग
किसानों की ललकार, 14 हजार परिवारों पर विस्थापन का खतरा
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा प्रस्तावित अपर नर्मदा परियोजना शोभापुर निरस्त करने के संबंध में आज दिनांक 10 जनवरी को हजारों किसानो ने विरोध जताते हुए यह मांग रखी है कि “हमें बाँध की आवश्यकता नहीं है” और हम किसी भी कीमत में बाँध का निर्माण नहीं होने देंगे।
उक्त प्रस्तावित बाँध से लगभग 14 हजार परिवार भूमियों से बेदखल किए जायेंगे। अपर नर्मदा परियोजना बाँध निर्माण से प्रभावित किसानों का कहना है कि हम अपनी भूमि किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
अधिग्रहित भूमि से मिलने वाली मुआवजा राशि भी हमें नहीं चाहिए। वहीं कुछ किसानों का कहना है कि हमें हमारी अधिग्रहित भूमि का सही दाम नहीं दिया जा रहा है।
कुछ किसानों का कहना है कि हमारी भूमि कृषि योग्य भूमि है तथा बिना बाँध के भी खेती (फ़सल) हो जाती है इसलिए हमें बाँध के आवश्यकता नहीं है। जिसमें मुख्यतः फसलें गेहूं, चना, धान, सोयाबीन आदि की अच्छी पैदावार है इसलिए हमें बाँध की आवश्यकता नहीं है। सरकार जबरन का बाँध बनाकर हमें हमारी बहुमूल्य भूमि जोकि हीरा है उसे छीन कर हमारे साथ अन्याय कर रही है।
वहीं किसानों का कहना है कि अपर नर्मदा परियोजना निरस्त न हुई तो होगा ‘पुष्पराजगढ़ बंद’, ग्रामसभाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पुष्पराजगढ़।
नर्मदा नदी पर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा अपर नर्मदा परियोजना का निर्माण प्रस्तावित किया गया है, एंव उपरोक्त परियोजना का डिजिटल भूमि पूजन भी कर दिया गया है, बांध निर्माण से अनुपपुर जिले का पुष्पराजगढ़ विकासखण्ड एंव डिण्डौरी जिले का बजाग तथा करंजिया विकासखण्ड के ग्राम प्रभावित हो रहे है, जो कि पूर्णतः पांचवी अनुसूचित क्षेत्र है. पेसा कानून 1996 तथा पेसा नियम 2022 मध्यप्रदेश लागू है।
पूर्व में अपर नर्मदा परियोजना प्रभावित कृषक संघर्ष मोर्चा के किसानों के द्वारा न्यायालय में बांध के विरोध में जनहित याचिका लगाई गई थी। लंबी कानूनी लड़ाई के चलते कैबिनेट व नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने बांध निर्माण परियोजना को वापस ले लिया था। 20 मार्च 2021 को समस्त समाचार पत्रों में छपी खबर के माध्यम से किसानों को ज्ञात हुआ कि पुनः केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद योजना को नए बजट के साथ प्रस्तावित किया गया जिसकी लागत 983 करोड 80 लाख है। बांध की ऊंचाई 33.80 मीटर पक्का बांध व इसके साथ ही 23.77 मीटर ऊंचा मिट्टी का बांध निर्माण किया जाएगा। किसानों ने इस संबंध में दमेहड़ी में 04 अप्रैल 2021 को बैठक आयोजित कर बांध निरस्त करने बावद प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 09/04/2021 को संवैधानिक रूप से विरोध प्रदर्शन कर राष्ट्रपति व राज्यपाल, अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली, मुख्यमंत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग मप्र व अन्य संवैधानिक विभागों के नाम एसडीएम डिंडौरी को ज्ञापन सौंपा गया था। उसके पश्चात 24 जुलाई 2023 को भी महामहिम राष्ट्रपति एंव राज्यपाल महोदय के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर अनुपपुर को परियोजना निरस्त करने संबंध में सौंपा गया। 08 अगस्त 2024 को संयुक्त ग्रामसभाओं की महापंचायत का आयोजन ग्राम दमेहडी में किया गया, जिसमें समस्त ग्रामसभाओं ने परियोजना का विरोध किया और परियोजना निरस्त करने संबंधी प्रस्ताव पारित कर ज्ञापन दिया गया। 6 अक्टूबर 2024 को महामहिम राज्यपाल के नाम से ज्ञापन सौंपा गया था। जिसमें नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री, संभाग डिण्डौरी और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसील पुष्पराजगढ द्वारा किसान संघर्ष मोर्चा को लिखित दिया गया था कि हमारे द्वारा किसी प्रकार का कार्य बांध क्षेत्र में नहीं किया जाएगा। उपरोक्त समस्त ज्ञापन के संबंध में क्या कार्यवाही हुई यह आज दिनांक तक प्रभावित किसानों को एवं किसान संघर्ष मोर्चा को जानकारी नहीं दी गई है।
उक्त बाँध निर्माण से जल स्त्रोत होगा प्रभावित
इस परियोजना से स्थानीय हजारों आदिवासियों सहित अन्य समुदाय के लोगों एवं उनके परिवारों पर संकट मंडरा रहा है। उक्त परियोजना नर्मदा नदी उदगम से 40 किलोमीटर नीचे बनाया जाना प्रस्तावित है, बांध के निर्माण से वैज्ञानिक मतों के आधार पर उद्गम के समीप बनाये जाने से जल स्त्रोत बंद हो जायेगा। 5 वीं अनुसूची के तहत अनुच्छेद 244 (1) और (2) में आदिवासियों को पूर्ण स्वशासन व नियंत्रण की शक्ति दी गई है। पेसा कानून, पेसा नियम तथा भू अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 41 के तहत कोई भी मरियोजना के निर्माण से पहले ग्राम सभाओं की सहमति अनिवार्य है. लेकिन नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और कलेक्टर अनुपपुर/कलेक्टर डिण्डौरी द्वारा सहमति नहीं ली गई जो कि संविधान की अवहेलना और अनुच्छेद 141 का खुला उल्लंघन है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत कार्य कर रही सरकार
सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी मप्र सरकार आदेशों के विपरीत कार्य कर आदिवासियों का विस्थापन कर रही है। जबकि आदिवासियों की आजीविका का मूल स्त्रोत कृषि के साथ वनोपज भी है। अपर नर्मदा परियोजना से आदिवासी वर्ग के यह स्त्रोत समाप्त हो जायेंगे। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुर्नस्थापना में पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 लागू किया गया, जिसके तहत स्थानीय स्वशासन संस्थाओं और ग्राम सभाओं के परामर्श से भूमि अधिग्रहण के लिए मानवीय, सहभागी और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है। केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा आदिवासियों के हक और अधिकार पर कुठाराघात किया जा रहा है, उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, परियोजना निर्माण से होने वाले विस्थापन को रोकने के लिए उक्त परियोजना का निर्माण निरस्त किए जाने का विरोध प्रदर्शन जारी है। एवं किसान संघर्ष मोर्चा विकासखण्ड पुष्पराजगढ़ जिला अनुपपुर के माध्यम से विकासखण्ड मुख्यालय में विशाल एक दिवसीय धरना प्रदर्शन एंव रैली का आयोजन कर ज्ञापन प्रेषित किया गया।
प्रमुख मांग
1. ग्रामसभाओं की सहमति के बिना अपर नर्मदा परियोजना निर्माण संबंधी समस्त कार्यवाही निरस्त की जावें।
2- संविधान के अनुच्छेद 244 (1) पांचवी अनुसूची, पेसा कानून 1996 तथा पेसा नियम 2022 म.प्र. एंव भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुर्नस्थापना में पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 41 का नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा पूर्णतः उल्लंघन किया गया है, इसलिए अपर नर्मदा परियोजना निरस्त किया जावे।
3- परियोजना निर्माण से शोभापुर एंव परसवाह ग्राम की सीमा में धार्मिक स्थल करबे मटटा करमश्री देवी स्थल जलमग्न हो जायेगा, इस स्थल में लाखों लोग पूजा अनुष्ठान करने आते है, उनकी धार्मिक आस्था के साथ कुठाराघात किया जा रहा है। अतः जन भावनाओं को देखते हुए परियोजना निरस्त किया जावे।4- परियोजना निर्माण स्थल से अनेक धार्मिक स्थलों के साथ ही प्राचीन पुरातात्विक स्थल तथा जैव विविधताएँ नष्ट हो जावेंगी। साथ ही प्रदेश में एक मात्र वृक्ष कल्प वृक्ष जो कि सिवनी संगम में स्थित है, वह जलभराव में नष्ट हो जावेगा।
5- यह कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा पूर्व में बनाए गए बांध रानी अवंति सागर परियोजना/बरगी बांध में विस्थापित किसान आज भी भटक रहे है, जिन्हें पुर्नव्यवस्थापन नहीं किया गया है, जो विस्थापित आदिवासी वनभूमि पर खेती कर रहे है, उन्हें भी वर्तमान में वनभूमि से बेदखल किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का एक भी मॉडल विस्थापित ग्राम नहीं है, जंहा नियमानुसार विस्थापित लोगों को बसाया गया है, जबकि भूमि अधिग्रहण कानून यह अधिकार देता है कि जनजाति समुदायों को उनकी वर्तमान बसाहट के अनुसार ही बसाया जावे, जिससे उनकी रीति रिवाज पंरपराएँ बोली भाषा संरक्षित हो, साथ ही शिक्षा, बिजली, पानी, सड़क, व रोजगार तथा कृषि का साधन हो, लेकिन देश के आदिवासियों को जंहा जंहा पर परियोजनाओं का निर्माण किया गया ये सुविधाओं से वंचित है। अतः यह परियोजना निरस्त की जावे।
6. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा वर्तमान में अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर पॉवर परियोजना तथा बसनियां बहुउददेशीय परियोजना डिण्डौरी मण्डला अनुपपुर में बनाई जा रही है, जिसमें लगभग 14000 परिवार बेदखल होंगें। परियोजना पैकेज की घोषणा सरकार द्वारा की गई लेकिन संविधान तथा अधिनियम-नियम अनुसार विस्थापितों का व्यवस्थापन कंहा होगा, कैसे होगा यह नहीं बताया गया, इससे यह प्रतीत होता है, विस्थापितों की कोई भी जवाबदेही के लिए शासन प्रशासन तैयार नहीं है। इसलिए इस परियोजना को निरस्त किया जावे।
7- यह कि जल निगम के द्वारा बांध निर्माण क्षेत्र में टंकी का निर्माण व अन्य निर्माण कार्य किया जा रहा है, यह परियोजना अपर नर्मदा बांध से संबधित है, बांध निर्माण के पूर्व ही जल निगम के द्वारा नवीन निर्माण कार्य किया जा रहा है कार्य पर रोक लगाया जावे, बांध प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना तथा नवीन निर्माण को सरकार के द्वारा विगत दो वर्ष पूर्व से रोक लगाया गया है, जल निगम के द्वारा किए जा रहे निर्माण की अनुमति भी विधिवत ग्रामसभा बैठक लिया जाना चाहिए, बगैर ग्रामसभा की अनुमति के किए जा रहे निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जावे।
इस संदर्भ में राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए किसान मोर्चा ने कहा कि संविधान के तहत जो संवैधानिक अधिकार अनुसूचित क्षेत्र में लागू है, उन संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन इन परियोजनाओं के निर्माण में किया जा रहा है, उन पर तुरत रोक लगाई जावे व परियोजना को निरस्त किया जावे। पांचवी अनुसूची में स्पष्ट है कि कोई भी जनजाति समुदाय को भूमिहीन नहीं किया जा सकता।
है, साथ ही भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 41 में स्पष्ट है कि पांचवी अनुसूची क्षेत्र में विस्थापन नहीं किया जा सकता अविलंब के तौर पर किया भी जाता है, तो ग्रामसभाओं की सहमति किसानों की सहमति अनिवार्य है। सरकार के द्वारा संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन व ग्रामसभाओं के आदेशों का उल्लघंन किया जा रहा है, ग्रामसभाओं के आदेशों के पालनार्थ परियोजना निरस्त की जावे। परियोजना के निरस्त संबंधी कार्यवाही नहीं की जाती है तो समस्त ग्रामसभाओं के द्वारा आगामी तिथि में पुष्पराजगढ़ बंद का आंदोलन किया जायेगा, जिसकी समस्त जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।













