April 17, 2026 8:34 pm

RNI No : MPHIN / 2017 / 76083

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जिला प्रशासन की उदासीनता बना दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण एवं पुनर्वास में रोड़ा

अनूपपुर। मध्य प्रदेश शासन के राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण एवं पुनर्वास संचालित किए गए हैं l जिले में दिव्यांग छात्रावास का संचालन पिछले सत्र तक किया गया परंतु वर्तमान शिक्षा सत्र के लगभग डेढ़ महीने बीत जाने के पश्चात भी दिव्यांग छात्रावास का संचालन ना किया जाना जिला प्रशासन की उदासीनता एवं डीपीसी जिला शिक्षा केंद्र अनूपपुर की संवेदनशीलता प्रदर्शित करती हैl छात्रावास का संचालन नहीं होने से दिव्यांग छात्र छात्राएं एवं उनके अभिभावक दोनों चिंतित हैं परंतु जिला प्रशासन एवं विभाग के अधिकारियों को इससे कोई सरोकार नहीं हैl जिले की वर्तमान स्थिति में अलग-अलग दिव्यांगता के बच्चों की संख्या सैकड़ो में हैl जिसमें शासन प्रशासन द्वारा महज 50 बच्चों हेतु दिव्यांग छात्रावास का संचालन किया जा रहा है एवं शेष प्रभावित दिव्यांग बच्चे उपेक्षित हैं l इसके साथ ही इन बच्चों की शिक्षण प्रशिक्षण एवं पुनर्वास की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रत्येक विकासखंड स्तर पर एक मोबाइल स्रोत सलाहकार की नियुक्ति की गई है जिनका कार्य प्रत्येक दिव्यांग बच्चों का सर्वे कर उन्हें शाला में दर्ज करवाना एवं उन्हें विद्यालय में या होम विजिट के माध्यम से आवश्यक प्रशिक्षण,थेरेपी एवं सुविधाएं प्रदान करना है परंतु इसकी जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है मोबाइल स्रोत सलाहकारो द्वारा यह कार्य भी नहीं किया जा रहा हैl गत वर्ष राज्य शासन के आदेशानुसार प्राथमिकता के आधार पर जिला शिक्षा केंद्र द्वारा दिव्यांग छात्रावास संचालन हेतु अनुभवी स्वयंसेवी संस्थाओं से आवेदन प्रस्ताव मांगे गए जिसका विज्ञापन ऐसे अखबारों में दिया गया जिसे सीधी जिले की सुंदरवती शिक्षा एवं सेवा समिति एवं इसी संस्था की परिचित संस्थाओं ने देखा और आवेदन किया एवं जिला शिक्षा केंद्र द्वारा आनन फानन में बीच सत्र में पदस्थ अधीक्षक को हटाकर दिव्यांग छात्रावास के संचालन का कार्य सुंदरवती शिक्षा एवं सेवा समिति अमिलई जिला सीधी को दे दिया गया l जबकि जिले एवं संभाग में भी इस विषय पर कार्य करने वाली अनुभवी संस्थाएं हैं जो वर्षों से कार्यरत हैं इस संपूर्ण कार्यवाही पर भी विभाग एवं प्रभारी द्वारा षड्यंत्र कर चयनित संस्था को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई लगता हैl उपरोक्त संबंध में पदस्थ अधीक्षक श्रीमती नंदिनी पटेल द्वारा बीच सत्र में उन्हें न हटाने एवं संचालन में खर्च राशि का भुगतान करने हेतु विभाग एवं जिला प्रशासन को कई बार पत्राचार किया गया परंतु कार्यवाही न होने पर उन्हें हाई कोर्ट की शरण में जाना पड़ा l उन्होंने सुंदरवती शिक्षा एवं सेवा समिति अमिलई पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं जिन्हें विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा अनदेखा किया जाना दिव्यांग छात्रावास के हित में नहीं है l इस संबंध में दिव्यांग कल्याण अभिभावक संघ के अध्यक्ष राजेश सिंह ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उपरोक्त आरोपों की जांच एवं समस्याओं का समाधान कर जल्द छात्रावास का संचालन प्रारंभ किया जाए ताकि पालकों की चिंता कम हो सके एवं कक्षा आठवीं के पश्चात दिव्यांग बच्चों की आगे की पढ़ाई हेतु भी व्यवस्था की जाए l साथ ही दिव्यांग छात्रावास के संचालन का कार्य स्थानीय जिले एवं संभाग की संस्थाओं को दिया जाए जो क्षेत्र में पूर्व से सेवाभाव से कार्यरत हैं l

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