April 17, 2026 9:07 pm

RNI No : MPHIN / 2017 / 76083

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नगर का विकास या सोन नदी किनारे राजनीति का खेल

विभागों को डूब क्षेत्र की ओर शिफ्ट करने से नगर की 75% आबादी पहले ही हो चुकी है प्रभावित, अब तहसील परिसर भी नदी के तट पर?

अनूपपुर। 2003 में जिला बनने के बाद से अब तक जिला मुख्यालय के विभागों को योजनाबद्ध तरीके से सोन नदी के तट पर शिफ्ट किया गया है। इस प्रक्रिया ने नगर की आबादी को बुरी तरह प्रभावित किया है। चेतना नगर और आसपास की कॉलोनियों तथा बस्ती में हालात यह हो गए हैं कि प्रशासनिक कार्यालयों के स्थानांतरण से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। और आवागमन लगातार कठिन होता जा रहा है। संयुक्त जिला कलेक्ट्रेट बनने के समय सभी विभाग एक ही परिसर में संचालित थे, लेकिन बाद में कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, आयुक्त कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण दफ्तरों को अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया गया। यानि यह कहा जाए तो कोई अतिसयोंक्तिपूर्ण बात नहीं होगी कि अब संयुक्त कलेक्ट्रेट कार्यालय नाम मात्र का रह गया है। विभागों को अलग करने से शासन का खर्च बढ़ा और नगरवासियों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ी। यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि संयुक्त कलेक्ट्रेट सिर्फ नाम मात्र का रह जाए। अब तहसील परिसर को भी नगर से हटाकर सोन नदी के डूब क्षेत्र में बनाया जा रहा है। जबकि तहसील परिसर में पहले से ही पर्याप्त जगह और पार्किंग की सुविधा मौजूद होने के बावजूद इस कदम ने मास्टर प्लान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधूरे फ्लाईओवर और अव्यवस्थित यातायात के बीच डूब क्षेत्र में तहसील का निर्माण नगर की समस्या में एक और इजाफा है। इस बदलाव का सबसे अधिक खामियाजा नगर की 75% आबादी को भुगतना पड़ेगा। बस्ती, सकरिया, चेतना नगर तथा आसपास की कॉलोलियों के रहवासी प्रभावित होंगे। साथ ही वकील भी तहसील को सोन के तट पर ले जाए जाने का विरोध कर रहे हैं। जोकि अब तक आसानी से तहसील पहुँच जाते थे। लेकिन अब फरियादियों को न्याय की आस में 6 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी। इसके विपरीत, सीतापुर और बरबसपुर के रहवासियों को इस फैसले से सुविधा मिल जाएगी। आदिवासी बहुल इलाके में रोजगार और साधनों की कमी पहले ही बड़ी चुनौती है। ऐसे में तहसील परिसर को नगर से दूर कर एवं डूब क्षेत्र में ले जाना आम जनता की परेशानी को और बढ़ा देगा। बहरहाल, अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह ने अपने लेटरहेड में स्पष्ट उल्लेख किया है कि तहसील पुराने स्थान पर ही रखा जाए। नगर के प्रबुद्धजन भी यही राय रखते हैं। तथा तहसील में वकील वर्ग भी तहसील का यथास्थान पर रखें जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन कलेक्टर ऑफिस के सोशल साइड से तहसील को यथास्थान पर रखने की बात कही है लेकिन अनूपपुर कलेक्टर भी तहसील को यथास्थान में रखने को लेकर लिखित देने से बचते दिख रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर डूब क्षेत्र में निर्माण की तैयारी ने पूरे जिले में असंतोष का माहौल बना दिया है। तहसील के नवीव भवन निर्माण पर एक सवाल और है कि जब जनता, जनप्रतिनिधि और वकील वर्ग पुराने स्थान पर तहसील बनाए रखने के पक्ष में हैं, तो फिर आखिर यह डूब क्षेत्र की ज़िद किसकी है और क्यों? इससे सीधा फायदा किसे पहुँचने वाला है।
बहरहाल हम यह मानते हैं कि अनूपपुर जिले में जब से मंत्री दिलीप जायसवाल की राजनीति सक्रिय हुई है तब से अनूपपुर में भाजपा के राजनीतिक मायने ने करवट बदली है और राज्य मंत्री रामलाल रौतेल की राजनीतिक तटस्थता भी जगजाहिर है। लेकिन सांसद महोदया का इस पर चुप्पी जनता को कहीं न कहीं खल रही है। लेकिन अब देखना यह दिलचस्प होगा कि तहसील परिसर को सोन के तट पर ले जाने पर, जनता के विरोध स्वर में बिसाहूलाल के अतिरिक्त कौन से नेता और जनप्रतिनिधि खुल कर आते हैं।

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