पांच साल से अटका है अनूपपुर का सपना, ठेकेदार और प्रशासन की सुस्ती पर उठ रहे सवाल?
अनूपपुर। जिला मुख्यालय का बहुप्रतीक्षित फ्लाइओवर ब्रिज अब जनता के धैर्य की परीक्षा बन गया है। रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित यह निर्माणाधीन पुल पिछले 4-5 वर्षों से अधर में लटका हुआ है। काम की रफ्तार इतनी धीमी है कि आम लोगों को लगने लगा है मानो यह पुल भी ‘राजनीतिक व प्रशासनिक आश्वासनों का एक और झुनझुना’ बनकर रह जाएगा। जिला कलेक्टर समय-समय पर मौका मुआयना कर सेतु निगम तथा रेलवे प्रशासन को आपसी तालमेल बिठाकर काम करने के निर्देश तो देते हैं लेकिन ठेकेदार और अधिकारी कलेक्टर के निर्देशों का कोई असर दिखाई नहीं देता है। काम की स्थिति देखकर लगता है मानो ठेकेदार सरकारी आदेशों को मज़ाक समझकर केवल ढांचा खड़ा करने का खेल खेल रहे हों। वहीं अन्य जिलों के पुल अनूपपुर पुल निर्माण के बाद से बनना प्रारम्भ हुए थे जोकि पूरे हो चुके हैं और आवागमन भी प्रारम्भ हो चुका है लेकिन अनूपपुर की अवाम अब भी इंतजार में है कि अपने नगर का ब्रिज कब तक बनकर तैयार हो जाएगा और कब आवागमन प्रारम्भ होगा।

जनता की सबसे बड़ी नाराज़गी यह है कि जब अनूपपुर का फ्लाइओवर निर्माण शुरू हुआ था, उसके बाद कई पड़ोसी जिलों व शहरी क्षेत्रों में पुलों का कार्य प्रारंभ हुआ था लेकिन अनूपपुर का पुल अभी भी अधूरा है। यह तुलना यहां के लोगों के घाव पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। परिणामस्वरूप जनता की मुश्किलें दिनों दिन और बढ़ती जा रही हैं। ब्रिज निर्माण प्रारम्भ होने के पूर्व रेलवे क्रॉसिंग पर घंटों फंसकर व जान का जोखिम लेकर लोग अपनी मंजिल तक पहुंच तो जाते थे लेकिन अब वह भी पूर्ण रूप से बाधित है। वहीं अंडरब्रिज की ऐसी दुर्दशा है कि दो बड़ी गाड़ियां अगर दोनों तरफ से निकलने लगे तो समूचा यातायात ढप्प हो जाता है। इसके अतिरिक्त ब्रिज निर्माण में देरी होने से मरीजों की एम्बुलेंस समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से जान पर खतरा रहता है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। त्योहारों, विवाह समारोह और मेलों में तो हालात बद से बदतर हो जाते हैं। नगर के बीचो बीच गुजरने वाली रेल लाइन के इस पार और उस पार के दोनों तरफ के व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। उनका मानना है कि यातायात ठप रहने से कारोबार चौपट हो गया है। तथा बस स्टैंड का पहुंच मार्ग अति संकुचन में होने से बचा हुआ व्यापार भी पूर्णतः प्रभावित हो गया है। ब्रिज निर्माण में पूर्ण होने की केवल सम्भावना जताई जा सकती है। तथा ब्रिज निर्माण में देरी से सवालों के घेरे में सेतु निगम के अधिकारी, ठेकेदार और रेलवे प्रशासन आ रहा है। क्योंकि रेलवे और संबंधित विभागों की ओर से भी उक्त ब्रिज निर्माण में कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। यही कारण है कि अनूपपुर का बहुप्रतीक्षित सपना आज भी अधूरा है। इसके अतिरिक्त पहला सवाल शासन से है कि “जब दूसरे जिलों के पुल पूरे हो सकते हैं तो अनूपपुर क्यों पीछे रह गया? क्या यहां की जनता का कोई दर्जा नहीं है? या ठेकेदार और अधिकारियों को जनता की तकलीफ नज़र नहीं आती?” प्रशासन की साख पर भी सवाल उठते हैं कि लंबे समय से लटक रहे इस फ्लाइओवर निर्माण ने न केवल ठेकेदार की कार्यशैली बल्कि प्रशासन की साख और प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर शासन-प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया होता तो अब तक यह पुल बनकर तैयार हो जाता। वहीं अनूपपुर का फ्लाइओवर अब केवल एक निर्माणाधीन ढांचा नहीं, बल्कि जनता की अधूरी उम्मीदों और टूटते भरोसे का प्रतीक बन चुका है। लोग हर दिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह इंतजार जारी रहेगा और कब नगर की जनता को जाम से मुक्ति मिलेगी? उक्त ब्रिज निर्माण पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी जनता के गुस्से को और भड़का रही है। चुनावी मंचों से “फ्लाइओवर जल्द बनेगा, जनता को राहत दिलाई जाएगी” जैसे वादे तो खूब किए गए, लोकार्पण से लेकर सैकड़ो नारियल फोड़े गए लेकिन काम की हकीकत जनता के सामने है। इससे यह कहा जा सकता है ठेकेदार और विभाग के बीच तालमेल की कमी सबसे बड़ी वजह हो सकती है। चूंकि अगले वर्ष तक ब्रिज निर्माण कार्य पूर्ण कर आवागमन सुगम करना है लेकिन जिस गति से कार्य किया जा रहा है उससे यहीं दिख रहा है कि अभी कम से कम 1 या 2 वर्ष कार्य में और लग सकते हैं या फिर और ज्यादा भी लग सकते हैं। तब तक नगर की यातायात व्यवस्था पूर्णतः चौपट रहेगी। और जनता, व्यापारी, अस्पताल पहुँच मार्ग, नौकरीपेशा लोग तथा स्कूल, कॉलेज के बच्चे भी प्रभावित होते रहेंगे। साथ ही सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुल निर्माण में तेजी लाने के बजाए तहसील परिसर को ले जाने की चहलकदमी जनता के समस्या में एक और इजाफा करना प्रतीत हो रहा है।













