अनूपपुर। एक ओर जब देश राष्ट्रीय ध्वज को सलाम कर रहा, देश के प्रधानमंत्री लालकिला से राष्ट्र के नाम संदेश दिया। वहीं आईजीएनटीयू में पीएचडी एडमिशन में हुई धांधली को लेकर एबीवीपी के छात्र पिछले दो दिनों से धरना दे रहें थे। इसी बीच स्वतंत्रता दिवस के दिन दोपक्ष आपस में भिड़ गए। और देखते ही देखते मामला इतना गरमा गया कि बातचीत, हाथापाई में तब्दील हो गया। उक्त धरना स्थल पर गैर आंदोलनकारियों का जाना, बेवजह की बातचीत करना और फिर बात हाथपाई तक पहुंचना। सीधा इशारा करता है कि उक्त विवाद पूर्ण रूप से सुनयोजित है। धरना, आंदोलन और अपने हक की लड़ाई का अधिकार छात्रों को संविधान देता है। लेकिन धरना स्थल को मारपीट और अराजक स्थिति में झोंकर धरना को प्रभावित करना छात्रों के अधिकार और मांग की लड़ाई की आवाज को कुचलने जैसा ही प्रतीत हो रहा है। और ऐसे अवसर पर जब देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, राष्ट्रीय ध्वज को सलाम कर रहा, नेता राष्ट्र के नाम सन्देश दे रहें हैं। ऐसे मौक़े पर एबीवीपी जैसे सक्रिय संघठन की आवाज को दबाना, लोकतंत्र की आवाज को दबाना है। ज्ञात हो कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) अमरकंटक में पीएचडी शोध प्रवेश परीक्षा (आरईटी) 2024–25 में कथित अनियमितताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन की दमनकारी नीतियों और वित्तीय गड़बड़ियों के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 14 और 15 अगस्त को सैकड़ों छात्रों के साथ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में घोटाले, पक्षपातपूर्ण चयन, आरक्षण उल्लंघन और शिकायतकर्ताओं के उत्पीड़न जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। उन्होंने न्यायिक व सीबीआई जांच की मांग की।
छात्रों का कहना है
परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि निष्पक्ष सीबीआई जांच चाहते हैं, लेकिन संलिप्त प्रोफेसरों द्वारा अफवाह फैलाई जा रही है ताकि जांच से ध्यान भटकाया जा सके।
तनाव का घटनाक्रम
प्राप्त सूत्रों के अनुसार, प्रशासन को आशंका थी कि छात्र 15 अगस्त को कुलपति प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी को ध्वजारोहण से रोकेंगे। इस आशंका में, कुलपति 13 अगस्त से अनुपस्थित रहने के बाद 15 अगस्त की सुबह तड़के 5 बजे गुप्त वाहन से परिसर पहुंचे और अपने करीबी प्रोफेसरों—भूमिनाथ त्रिपाठी, विकास सिंह, तरुण ठाकुर, भदौरिया और संतोष सोनकर—के माध्यम से मुख्य गेट बंद करा दिया। इससे परिसर में तनाव बढ़ा और झड़प की घटनाएं हुईं।
प्रोफेसरों पर दंगा भड़काने के आरोप
मारपीट की घटनाओं के बाद छात्रों में गहरा आक्रोश है। विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा है कि प्रोफेसर भूमिनाथ त्रिपाठी, विकास सिंह, तरुण ठाकुर और संतोष सोनकर ने अपना दबदबा बनाए रखने के लिए कथित गुंडा प्रवृत्ति वाले अपने चहेतों को पीएचडी प्रवेश परीक्षा में संदिग्ध तरीके से प्रवेश दिलाया। एबीवीपी और साथी पीड़ित छात्र इस परीक्षा की जांच की मांग कर रहे थे। लेकिन धरना को प्रभावित करने के उद्देश्य से दंगाई मानसिकता सक्रिय हो कर छात्र को आपस में भिड़ा दिया गया। ताकि आरईटी घोटाले से जुड़ा मुख्य मुद्दा दब जाए। विश्वविद्यालय में यह भी चर्चा है कि यदि इस मामले में सीबीआई जांच हुई तो न केवल परीक्षा प्रक्रिया, बल्कि परिसर में हुए कई टेंडर और वित्तीय लेन-देन से जुड़े चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, जिनसे दोषियों को जेल तक जाना पड़ सकता है। वहीं स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान मंच से हड़बड़ी में भड़काऊं टिप्पणी भी किए हैं। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जिसकी सूक्ष्म की जानी चाहिए।
घोटाले के आरोप
जीएफआर 2017 और वैधानिक टेंडर/ईओआई प्रक्रिया की अनदेखी। प्रश्नपत्र निजी ईमेल आईडी से मंगाना, गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन। परिणामों में अपारदर्शिता—मुख्य परिसर में नाम छिपाना, मणिपुर केंद्र में नाम स्पष्ट।
कंप्यूटर साइंस के नतीजे सार्वजनिक न करना, गुप्त रूप से प्रवेश देना। यूजीसी नेट और गेट योग्य कुछ अभ्यर्थियों को इंटरव्यू से वंचित करना। मात्र 11 और 18 अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी प्रवेश देना। प्रोफेसरों और स्टाफ के परिजनों को प्राथमिकता, आरक्षण नियमों का उल्लंघन। संदिग्ध डिग्रियों और फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग। कर्मचारियों और स्टाफ के मुद्दे ज्ञापन में सुरक्षाकर्मियों और सपोर्ट स्टाफ के वेतन कटौती, वरिष्ठता अनुसार पदोन्नति न देने, श्रम कानूनों के उल्लंघन और स्थानीय आदिवासी कर्मचारियों की अवैध छंटनी के आरोप भी शामिल हैं। छात्रों ने मांग की कि सभी पीड़ित कर्मचारियों को पुनः बहाल किया जाए और आउटसोर्सिंग भर्तियों को बहाल कर स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता दी जाए।
अन्य गंभीर शिकायतें
नर्सिंग और बी-टेक कोर्स में धोखाधड़ी।
अवैध कैंटीन संचालन, LBI और अमरकंटक बेकरी के अनियमित लेन-देन। छात्रावास में अवैध तोड़फोड़, नर्मदा हॉस्टल को रेजिडेंशियल बनाना। स्वच्छ पेयजल और सफाई की कमी से छात्रों का बीमार होना। बस सेवा बंद कर कुलपति के निजी कार्यों में उपयोग। आईसीसी गठन में यूजीसी नियमों का उल्लंघन और शिकायतों का निस्तारण न होना। वित्तीय पारदर्शिता का अभाव आय, व्यय और भुगतान रसीदें सार्वजनिक न करना। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी न देना। छात्रों ने कहा कि यह मामला केवल IGNTU तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और उच्च शिक्षा की साख पर सीधा सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।













