अनूपपुर। मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री एवं अनूपपुर विधानसभा के विधायक बिसाहूलाल सिंह ने जनहित के मुद्दों को लेकर विधानसभा का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा की जिला अनूपपुर में हाथियों के प्रवास को रोकने एवं उनके द्वारा की गई क्षति की क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर वास्तविक क्षतिपूर्ति दिलाया जाए।
बिसाहूलाल सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष एवं वन विभाग के मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि म.प्र. और छत्तीसगढ़ के सीमा से बसे जिला अनूपपुर में छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों का प्रवास निरंतर 2-3 वर्षों से हो रहा है। हाथी प्रवास के दौरान जिले के विभिन्न जंगली क्षेत्रों में जाकर यहाँ बसे खेतिहर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के घरों को तोड़कर उनके घरों में रखे महुआ, धान, गेहूँ एवं अन्य उत्पादों को खाते है। उनके खेतों, बाड़ियों में लगाये फसलों को खाने के साथ-साथ उजाड़कर नष्ट कर देते है। उनके घरों में तोड़ फोड़ कर देते है। जंगल एवं उसके आस-पास बसे ग्रामीणों को अपने घरों में भी रहना दुस्बार कर दिये है। कई बार लोगों के घरों को उजाड़ने के कारण लोगों को घर की छतों एवं पेड़ों में चढ़कर रात बिताना पड़ता है। सामग्रियों को पेड़ों की डालियों में बांधकर रखने का प्रकरण भी विगत बार हाथियों के प्रवास के दौरान सामने आया था। ग्राम पंचायत चोलना अंतर्गत ग्राम बचहा में पिछले बार एक युवक को पटक कर मार डाला था। पगना के पास गांव में बिजली के करंट से फॅसकर खेत में एक हाथी के मर जाने से कृषक को जेल भी जाना पड़ा था। वर्तमान में हाथी 08.07.2025 को मरवाही छत्तीसगढ़ से जिला अनूपपुर के ठेही गौरेला, पगना, कांसा कोडा, दुधमनिया, औढेरा कीरर के रास्ते राजेन्द्र ग्राम की ओर प्रस्थान कर अमगंवा होते हुए जिला डिण्डौरी तक प्रवास किये तथा वापस अमगंवा से बुढार, शहडोल रेन्ज को पार कर जिला उमरिया के घुनघुटी तक जाकर पुनः शहडोल, बुढार रन्ज के रास्ते 02.07.2025 को अनूपपुर अंतर्गत जैतहरी रेंज के ग्राम पडरिया, चोई में आतंक फैलाने एवं ग्राम चोई के रामपाल राठौर पिता वंशी राठौर उम्र 39 वर्ष को मार डालने की घटना प्रकाश में आया है। जिला अनूपपुर के वन विभाग सहित पूरे जिले के अधिकारी कर्मचारियों सहित डी.एफ.ओ. एवं कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक अधीक्षक परेशान है हाथियों के बार-बार जिला अनूपपुर प्रवास किये जाने का मूर्मेन्ट रोकने एवं उनके द्वारा जिले में किये कराया जाना आवश्यक है। हाथियों के द्वारा किए जा रहे क्षतियों की प्रतिपूर्ति के दर को बढ़ाते हुए वास्तविक क्षति का क्षतिपूर्ति एवं राहत राशि उपलब्ध कराई जाए।
जिला एवं सत्र न्यायालय भवन की राशि की जाए स्वीकृत
अनूपपुर विधायक पूर्व मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने जनहित को देखते हुए विधानसभा का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जिला अनूपपुर में माननीय मुख्यमंत्री के घोषणा दिनांक 09.08.2023 एवं दिनांक 16.08.2024 के अनुसार जिला एवं सत्र न्यायालय भवन का निर्माण हेतु राशि स्वीकृत किया जाना था लेकिन अभी तक राशि स्वीकृत नहीं हो सकी। अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह ने कहां की म.प्र. एवं छत्तीसगढ़ के सीमा पर बसे म.प्र. के अंतिम छोर विंध्य सतपुड़ा एवं मैकल की पर्वत श्रेणियों की गोद एवं माँ नर्मदाचल की पावन धरा में स्थित अनूपपुर का निर्माण 14.08.2003 में हुआ था। तब से अब तक जिला अनूपपुर के मुख्यालय में संचालित जिला एवं सत्र न्यायलय अनूपपुर का संचालन भवन के अभाव में पुराने जीर्णशीर्ण तुलसी महाविद्यालय के रिक्त भवन में किया जा रहा है। जहाँ पर – न्यायधीशों के बैठक एवं सुनवाई हेतु कक्ष न्यायालय के विभिन्न प्रकरणों के विभिन्न प्रकार के न्यायालयों के न्यायधीशों के बैठक एवं सुनवाई हेतु कक्ष अधिवक्ताओं के बैठक कक्ष, पेशी में आने वाले साक्ष्यों के – प्रतीक्षा कक्ष कैदियों को रखने हेतु अभिरक्षा कक्ष, कैदियों के परिजनों के प्रतीक्षा कक्ष आँचल कक्ष, शौचालय, फोटोकॉपी कक्ष सहित अन्य आवश्यक कक्षों एवं अन्य प्रकार की सुविधाओं का भवन के स्वीकृत नहीं होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिस संबंध जिले के अधिवक्ताओं, जनप्रतिनिधियों के द्वारा विगत कई बार धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन देकर ध्यान आकर्षित कराया गया है। मेरे द्वारा भी कई बार पत्राचार एवं विधानसमा प्रश्न व ध्यानकर्षण के माध्यम से अनुरोध किया गया है। किन्तु शासन के पास राशि का अभाव का हवाला देकर टाल दिया जाता है। विगत वर्ष 9 सितम्बर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं 16.08.2024 को वर्तमान मुख्यमंत्री के द्वारा शीघ्र ही जिला एवं सत्र न्यायालय अनूपपुर का निर्माण हेतु राशि स्वीकृत कराये जाने संबंधी घोषणा की गई थी, किन्तु अभी तक उक्त कार्य की स्वीकृत आदेश जारी नहीं किया गया है। जिसे राशि के अभाव होने पर मुख्यमंत्री विशेष निधि से निर्माण कार्य स्वीकृत कराया जा सकता है। प्रदेश के जिम्मेदार पद पर बैठे प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा उक्त कार्य की प्रशासकीय सकीय स्वीकृति प्रदान नहीं की जा रही है। राशि शीघ्र स्वीकृत कराया जाए जिससे कि जिला सत्र न्यायालय के भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो सके और जनता को सुविधा मिल सके।













