April 17, 2026 4:48 pm

RNI No : MPHIN / 2017 / 76083

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आईजीएनटीयू मे पीएचडी प्रवेश की प्रकिया व छात्रों के खिलाफ दमनकारी नीतियों के खिलाफ एबीवीपी मुखर

  • पीड़ितों द्वारा जांच की मांग से चिहुंक उठे संदिग्ध शोध प्रवेशार्थी
    एबीवीपी ने सैकड़ों छात्रों के साथ किया धरना-प्रदर्शन, CBI जांच की मांग
  • अनूपपुर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) अमरकंटक में पीएचडी शोध प्रवेश परीक्षा (आरईटी) 2024–25 में कथित अनियमितताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन के कथित दमनकारी नीतियों और वित्तीय गड़बड़ियों के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 14 अगस्त गुरुवार को सैकड़ों छात्रों के साथ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया, बताया गया प्रदर्शन पूरे 2 दिन के लिए तय हुआ है। आंदोलनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में घोटाले, पक्षपातपूर्ण चयन, शिकायतकर्ताओं के उत्पीड़न और वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए न्यायिक व सीबीआई जांच की मांग की। वहीं मामले में संदिग्ध आरईटी समन्वयक आदि के संबंध में चर्चा है कि संदिग्ध छात्रों और कुछ स्थानीय भोले-भाले आदिवासियों को बरगला कर पीड़ित छात्रों के खिलाफ अहिंसक बर्ताव करने के लिए उकसाया जा रहा है। जबकि छात्रों ने सिर्फ जांच की मांग की है, न कि रद्द करने की, कहा जा रहा कि ऐसी अफवाह इसलिए फैलाया जा रहा कि संलिप्त प्रोफेसर्स को यह बात पता है कि यदि सीबीआई जांच हुई तो परीक्षा के साथ-साथ फर्जीवाड़ा करने वाले भी नपेंगे!

    RET परीक्षा में नियमों की धज्जियां

    जीएफआर 2017 और वैधानिक टेंडर/ईओआई प्रक्रिया का पालन किए बिना परीक्षा आयोजन। प्रश्नपत्र निजी ईमेल आईडी से मंगाने का गंभीर गोपनीयता उल्लंघन, अम्बेडकर चेयर, पर्चेज कमेटी और GEM पोर्टल के माध्यम से करोड़ों का फंड दुरुपयोग — ऑडिट जांच की मांग।

    परिणामों में अपारदर्शिता और पक्षपात

    मुख्य परिसर के परिणामों में नाम छिपाए गए, जबकि मणिपुर केंद्र में नाम स्पष्ट। कंप्यूटर साइंस के परिणाम सार्वजनिक न कर गुप्त रूप से ईमेल द्वारा प्रवेश। UGC-NET और GATE योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू से वंचित कर प्रोफेसरों व स्टाफ के परिजनों का चयन। 11 और 18 अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को डिस्क्वालिफाई होने के बावजूद प्रवेश।आरक्षण नियमों का उल्लंघन और सीटों में मनमानी बदलाव।

    प्रोफेसरों की संदिग्ध भूमिका और फर्जी दस्तावेज़

    प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी और प्रो. भूमिनाथ त्रिपाठी पर मनमाने चयन के आरोप। ओएमआर शीट्स विश्वविद्यालय के बाहर भरने का आरोप। चयनित अभ्यर्थियों की डिग्रियां संदिग्ध। RET समन्वयक को निष्पक्ष जांच तक निलंबित करने की मांग।

    सुरक्षा कर्मियों के साथ भी अन्याय!

    ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सुरक्षाकर्मियों और सपोर्ट स्टाफ के साथ हो रहा अन्याय तत्काल रोका जाए। अतिरिक्त ड्यूटी लेकर कम दिनों का वेतन देना, वरिष्ठता के अनुसार पदोन्नति न देना, श्रम कानूनों और सेवा शर्तों का उल्लंघन करना, तथा स्थानीय आदिवासी कर्मचारियों (जैसे प्रभा देवी आर्मों, अनिल कुमार टांडिया, कृष्णपाल सिंह आदि) को बिना कारण हटाना अमानवीय है। सभी पीड़ित कर्मचारियों को पुनः बहाल किया जाए और वेतन कटौती तुरंत वापस हो। साथ ही, पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुई सभी आउटसोर्सिंग भर्तियों को बहाल कर स्थानीय बेरोजगारों को पुनः रोजगार दिया जाए, ताकि संस्थान की कार्यसंस्कृति और सामाजिक संतुलन दोनों सुरक्षित रहें।

    गड़बड़ी पकड़ने वाले छात्रों का उत्पीड़न

    घोटाले का खुलासा करने वाले छात्रों पर झूठे मामले दर्ज। पूर्व छात्र रवि त्रिपाठी के खिलाफ दर्ज फर्जी शिकायत तत्काल वापस लेने की मांग। नर्सिंग और बी-टेक कोर्स में धोखाधड़ी
    प्रशासकीय स्वीकृति के बावजूद नर्सिंग कोर्स शुरू नहीं। रिकॉर्ड में फर्जी रूप से कोर्स शुरू दिखाना।बी-टेक संचालन का झूठा आश्वासन देकर छात्रों का भविष्य खतरे में डालना।
    अन्य गंभीर मुद्दे, अवैध कैंटीन संचालन, LBI और अमरकंटक बेकरी।

    छात्रावास में अनियमितताएं

    नर्मदा हॉस्टल को रेजिडेंशियल बनाना, छात्रावास ढांचे में अवैध तोड़फोड़। वेबसाइट अपडेटेशन में गड़बड़ी प्रो. भूमिनाथ त्रिपाठी को तत्काल हटाने की मांग। स्वच्छ पेयजल और सफाई के अभाव में छात्र बीमार पड़ रहे। बस सेवा बंद — कुलपति के निजी कार्यों में उपयोग। आईसीसी गठन में यूजीसी नियमों का उल्लंघन — शिकायतों का निस्तारण न होना। वित्तीय पारदर्शिता का अभाव — आय-व्यय और भुगतान रसीदें सार्वजनिक न होना।

    आरटीआई का उल्लंघन

    मांगी गई जानकारी छात्रों को न देना। सुरक्षाकर्मियों और सपोर्ट स्टाफ का शोषण — वेतन कटौती, अवैध छंटनी, स्थानीय बेरोजगारों की भर्ती बहाली की मांग,

    देशव्यापी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

    छात्रों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ IGNTU तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और उच्च शिक्षा व्यवस्था की साख पर सीधी चोट है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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