14-15 अगस्त को सैकड़ों छात्रों के साथ धरना प्रदर्शन तय, सीबीआई जांच की मांग तेज
अनूपपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) अमरकंटक में पीएचडी शोध प्रवेश परीक्षा (आरईटी) 2024-25 सहित अध्ययनरत छात्रों, शोषित सुरक्षाकर्मियों और विश्वविद्यालय प्रशासन की दमनकारी नीतियों से पीड़ित स्थानीय जनों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने ऐलान किया है कि 14 और 15 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर RET फर्जीवाड़ा मामले में सीबीआई जांच की मांग को बुलंद किया जाएगा, जांच पूरी होने तक आरईटी समन्वयक को सभी प्रभारों एवं दायित्वों से पृथक करते हुए जांच प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग रोकने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने हेतु अस्थायी रूप से कार्य से अलग किए जाने, जिससे वें न तो दफ्तर का काम देख सकें और न ही सबूतों पर प्रभाव डाल सकें। की मांग भी की जाएगी। एबीवीपी ने जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रशासन से सहयोग का आग्रह किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर जांच में देरी हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
इन मुद्दों पर छात्र देंगे धरना
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) अमरकंटक में पीएचडी शोध प्रवेश परीक्षा (आरईटी) 2024-25 सहित कई मामलों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए छात्रों और शिकायतकर्ताओं ने सीबीआई जांच की मांग की है। आरोपों में परीक्षा प्रक्रिया में जीएफआर 2017 और वैधानिक टेंडर/ईओआई प्रक्रिया का उल्लंघन, करोड़ों के फंड में वित्तीय भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र निजी ईमेल से मंगवाना, बिना सील और कोड वाले प्रश्नपत्र वितरित करना, परिणामों में अपारदर्शिता और पक्षपातपूर्ण चयन, योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर नॉन-टीचिंग स्टाफ व प्रोफेसरों के परिजनों को फर्जी डिग्रियों से प्रवेश, ओएमआर शीट्स में छेड़छाड़ और स्कैनिंग के दौरान डाटा इंटरसेप्शन की आशंका, आरक्षण नियमों का उल्लंघन, प्रोफेसरों की संदिग्ध भूमिका व गुटबाजी, शिकायतकर्ताओं का उत्पीड़न, नर्सिंग व बी-टेक कोर्स में धोखाधड़ी, अवैध कैंटीन संचालन, छात्रावासों में अवैध कब्जा और संरचना में तोड़फोड़, गर्ल्स हॉस्टल में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव, वेबसाइट पर असत्यापित दस्तावेज और अपडेटेशन में लापरवाही, स्वच्छता व पेयजल संकट, बस सेवा बंद कर कुलपति के निजी कार्यों में उपयोग, आंतरिक शिकायत समिति में खामियाँ, वित्तीय पारदर्शिता का अभाव, सूचना के अधिकार का उल्लंघन, अकादमिक कैलेंडर का केवल कागजों में होना, और सुरक्षाकर्मियों का वेतन कटौती व श्रम कानूनों की अनदेखी शामिल हैं। छात्रों ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ आईजीएनटीयू तक सीमित नहीं, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और उच्च शिक्षा की साख पर भी सवाल उठाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
हाईकोर्ट में भी मामला विचाराधीन अगस्त अंत में अगली सुनवाई
विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं आरईटी परीक्षार्थी रवि त्रिपाठी ने मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट पिटीशन दायर की है। 1 अगस्त को हुई सुनवाई में उनके अधिवक्ता ने संदिग्ध चयनित अभ्यर्थियों के नाम और पते प्राप्त करने के लिए समय मांगा। अदालत ने सुनवाई को अगस्त के अंतिम सप्ताह तक स्थगित करते हुए मामले को गंभीर माना है।
दागी और विवादित प्रोफेसर को अभयदान
पूर्व में पीएचडी प्रवेश परीक्षा के मामले में वर्तमान आरईटी समन्वयक प्रो. भूमिनाथ त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लग चुके थें, प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत भी की गई थी, इसके बाद इस वर्ष भी इन्हें ही आरईटी की जिम्मेदारी कैसे दे दी गई? यह भी जांच का विषय है, हालांकि जांच के विषय तो इन्हें आईजीएनटीयू मे दिए गए नियुक्ति (पुलिस वेरिफिकेशन आदि) एवं पदोन्नति, या प्रभार वितरण संबंधी दस्तावेज भी हैं।
बिना टेंडर कराई परीक्षा
छात्रों का आरोप है कि परीक्षा आयोजन में जीएफआर 2017 के तहत न तो टेंडर जारी किए गए और न ही ईओआई आमंत्रित की गई। प्रश्नपत्र बिना सील और कोड के वितरित किए गए तथा परिणाम तीन अलग-अलग प्रारूप में जारी हुए।
देशव्यापी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
छात्रों का कहना है कि यह मुद्दा केवल आईजीएनटीयू तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और उच्च शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी चोट करता है।














