भोपाल। पूर्व नगरीय निकाय चुनाव में जहाँ पार्षद के द्वारा अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव पास किया गया था। जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में दिन मंगलवार 9 सितम्बर को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। सबसे बड़ा बदलाव नगरीय निकाय चुनाव से जुड़ा है, जिसके तहत अब नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। यह व्यवस्था वर्ष 2027 के आम चुनाव से लागू होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय माना जा रहा है। इनमें सबसे बड़ा फैसला नगरीय निकायों की चुनाव प्रणाली से जुड़ा रहा। अब नगर पालिका परिषद और नगर परिषदों के अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। यानी आगामी आम चुनाव वर्ष 2027 से मतदाता सीधे अपने वोट से अध्यक्ष का चयन करेंगे। वर्ष 2022 तक नगर पालिका और परिषदों में अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही होता था, लेकिन बाद में इसे बदलकर अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू कर दी गई थी। इसमें पार्षदों के मतों से अध्यक्ष चुना जाता गया था। इस व्यवस्था में राजनीतिक जोड़-तोड़ और अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। जनता का सीधा जनादेश ही लोकतंत्र की असली ताकत है। नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों को बार-बार अविश्वास प्रस्तावों से बचाने के लिए उनके प्रत्यक्ष चुनाव की व्यवस्था लागू करने का कैबिनेट ने निर्णय लिया है। इसी दृष्टि से नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2025 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 19, 20(2), 32 से 35, 43, 45, 47, 55, 63 और 328 सहित कई धाराओं में संशोधन किया जाएगा।













