अनूपपुर। आरओबी निर्माण कार्य विगत 7 वर्षों से अधर में है। इस बीच राजनीतिक एवं प्रशासनिक चहलकदमी होते रहे हैं तथा धीमी गति के निर्माण पर जनता अपना गुस्सा समय समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से जाहिर करती है। बावजूद सेतु निगम एवं रेलवे अपने कार्य में तेजी लाते नहीं दिख रहे हैं। मौका स्थिति देखने से ज्ञात हुआ कि रेलवे क्रासिंग में अभी फाउंडेशन कार्य भी अधूरा दिख रहा है। और ऐसे में यह कहना कि मार्च 2026 में कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है। वहीं मौका देखने से यहीं स्पष्ट होता है कि 6 माह में कार्य पूर्ण होने की स्थिति किसी भी तरह से सम्भव होते दिखाई नहीं देता है। उस पर रेलवे का द्वारा ऐसे जबाव गैरजिम्मेदाराना जबाव ही कहा जा सकता है।
जिला विकास मंच की मांगें
जिला विकास मंच के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता वासुदेव चटर्जी ने रेलवे से प्रमुख मांग इस प्रकार की है :-
•अनूपपुर रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण उच्च गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूरा किया जाए।
•प्लेटफार्म क्रमांक 1 से 3 और 4 को जोड़ने वाला नया एफ.ओ.बी. (लिफ्ट और रैम्प सहित) शीघ्र निर्मित हो।
•बी.के.-61 रोड ओवरब्रिज का कार्य समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाए।
•स्टेशन परिसर में यात्रियों के लिए पे-एन-यूज़ सुलभ कॉम्पलेक्स और जन औषधि केंद्र खोला जाए।
•प्लेटफार्म क्रमांक 3 और 4 की ऊँचाई बढ़ाई जाए और दोनों दिशाओं में प्रसाधन की उचित व्यवस्था की जाए।
रेलवे प्रशासन ने जवाब में केवल इतना कहा कि “निर्माणाधीन ओवरब्रिज का कार्य बिलासपुर मंडल द्वारा गुणवत्तानुसार कराया जा रहा है और इसके मार्च 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है।” बाकी मांगों पर कोई जवाब नहीं दिया गया।
निर्माण में देरी को लेकर जनता में आक्रोश
रेलवे के जबाव के बाद स्थानीय जनता में आक्रोश व्याप्त है। और जनता का आक्रोश नजरअंदाज भी नहीं किया सकता है। क्योंकि बीते 7 वर्षो से अनूपपुर नगर 2 भागों में विभाजित है। अनूपपुर नगर के बीचों-बीच स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य शुरू हुए 7 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यह कार्य अधूरा है। इस दौरान कई बार राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बैठकें, निरीक्षण और घोषणाएँ होती रहीं, मगर धरातल पर स्थिति जस की तस रही। आम लोगों को एक ओर से दूसरी ओर आने जाने में जेब पर अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। दैनिक यात्रियों, मजदूरों, छात्रों वकील एवं कर्मचारियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और सेतु निगम को इस समस्या का तनिक भी अफसोस नहीं है, जबकि जनता 7 वर्षों से परेशानी झेल रही है। तथा मध्यम और निचले स्तर के स्थानीय व दूरस्थ इलाकों से आने वालों के जेब पर महंगाई के हिसाब से अतिरिक्त भार दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों का मौन
सबसे गंभीर सवाल यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। चाहे नगरपालिका, विधायक या सांसद स्तर पर, किसी ने भी अब तक इस देरी पर कड़ा रुख नहीं अपनाया। जनता का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि दबाव बनाते तो यह कार्य वर्षों पहले ही पूरा हो गया होता। आरओबी निर्माण का मामला अब केवल तकनीकी या प्रशासनिक देरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जनता के धैर्य और भरोसे की परीक्षा बन गया है। वहीं मार्च 2026 तक भी कार्य अधूरा रह गया, तो जनता का आक्रोश आंदोलन का रूप ले लेने की प्रबल सम्भावना दिखाई दे रही है।














