जैतहरी। एक ओर जहाँ राज्य की सरकार सब “पढ़े सब बढ़े” का नारा लिए गलियों में बैनर, पोस्टर और दीवाल लेखन का कार्य कराकर शासकीय कोष को खाली कर शिक्षा के प्रति जागरूक तो कर रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर प्रदेश के भवन व्यवस्था का सरकारी ढांचा मऊगंज के ढहे हुए स्कूल भवन के भांति जर्ज़र होना जान पड़ता है।
ज्ञात हो कि जैतहरी जनपद पंचायत के प्रांगण स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन लगभग 30 वर्षो से अधिक पुराना भवन है तथा उक्त भवन में जनपद जैतहरी का सभागार संचालित होता था। और उसी जर्ज़र भवन में अब कक्षा 1 से 5 तक बच्चे अध्ययनरत हैं। वह 7 नौनिहाल इस बात से अनभिज्ञ हैं कि उनके सिर पर मौत मंडरा रहा है। लेकिन जिला मुख्यालय के जिम्मेदार अधिकारी इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि जो नौनिहाल आज प्राथमिक विद्यालय मनागंज में अध्ययनरत हैं उनमें से कोई कलेक्टर, एसपी का जज्बा लिए हुए हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी आँख, कान बंद किए हुए हैं।
2 वर्ष पूर्व शाला प्रबंधन समिति क्षतिग्रस्त भवन मरम्मत हेतु भेज चुके हैं प्रस्ताव

शाला प्रबंधन समिति शासकीय प्राथमिक विद्यालय मनागंज (जैतहरी) के द्वारा दिनांक 20 जुलाई 2023 को विद्यालय भवन की क्षतिग्रस्त स्थिति को देखते हुए एसएचसी के अध्यक्ष एवं सदस्यों की मीटिंग रखा गया एवं इसकी छत मरम्मत को लेकर चर्चा करते हुये सभी सदस्यों से निरीक्षण कराया गया। जिसमें की यह निर्णय लिया गया की छत व विद्यालय भवन 30 वर्ष से अधिक पुराना है। तथा स्थिति दुर्घटना पूर्ण है। भवन की छत में बल्ली एवं लकड़ी सड़ कर कमजोर हो चुके हैं। जो कि कभी भी दुर्घटना की स्थिति निर्मित करता है। तथा सभी स्थानों से पानी चूने की भी समस्या है। चूंकि विद्यालय भवन मतदान केन्द्र क्र. 201 जैतहरी 187 – अनूपपुर भी है। इस हेतु छत के लिये नये स्तर से कार्य कराना अतिआवश्यक है। नये छत हेतु तत्कालिक रूप से लोहे की पाइप एवं कलबेस्टर (क्लैम्प) के स्थान पर नये टीन लगाना एवं फर्श मरम्मत कराये जाने का निर्णय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया था।
पूर्व में हो चुका है क्षतिग्रस्त भवन का फोटोग्राफी एवं मौका पंचनामा

शासकीय प्राथमिक विद्यालय मनागंज जैतहरी के क्षतिग्रस्त भवन का निरीक्षण बीएलओ द्वारा दिनांक 20 जुलाई 2023 को मौका निरीक्षण के दौरान पाया कि उक्त भवन (विद्यालय) की छत दुर्घटनापूर्ण स्तिथि में हैं तथा लकड़ी की बल्लियां एवं राफ्टर सड़ चुके हैं। चूंकि विद्यालय (भवन) 30 वर्ष से भी पुराना है। अतः छत का निर्माण कार्य नये सिरे से कराया जाना अनिवार्य है। बावजूद इसके आज दिनांक तक जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा न तो विद्यालय (भवन) का मरम्मत कराया गया और न ही नये भवन की स्वीकृति प्रदान की गई। जिससे दुर्घटना की स्थिति व्याप्त है।
शौचालय में पानी का वैकल्पिक व्यवस्था
मौक़े का मुआयना करने के बात ज्ञात हुआ कि उक्त विद्यालय के डॉयलेट में पानी जनपद पंचायत के प्रांगण से लाकर उपयोग किया जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक शिक्षिका भी वहां बच्चों को पढ़ाती हैं तथा रसोईयाँ को सँभालने में भी एक महिला है। ऐसे में विद्यालय में अव्यवस्था की स्तिथि निर्मित होती है। तथा अध्ययनरत नौनिहालों के लिए उक्त बोरिंग के पानी से ही भोजन भी पकाया जाता है। बारिश के मौसम के दृष्टिगत सवाल यह उठता है कि क्या उक्त बोरिंग का पानी बच्चों के उपयोग हेतु उपयुक्त है अथवा नहीं इसका निरीक्षण किया जाना चाहिए। ताकि बच्चे व शिक्षक किसी बीमारी के चपेट में आने के पूर्व बचाए जा सकें।
रसोई भी अव्यवस्थित
निरीक्षण में पाया कि जहाँ बच्चों के लिए खाना पकाया जाता है वह विद्यालय (भवन) से सटा हुआ है। तथा रसोई भी पूर्ण रूप से जर्जर अवस्था में है। दीवालों में सीपेज़ उपस्थित है। इसके अतिरिक्त रसोई में कहीं भी फायर सेफ्टी उपकरण अग्निशामक यंत्र तथा प्राथमिक उपचार बॉक्स विद्यालय को मुहैया नहीं कराया गया है। जिससे दुर्घटना की स्तिथि कभी भी निर्मित हो सकती है। तथा चूल्हा और सिलेंडर जमीन में रखा हुआ पाया गया। जबकि चूल्हा गैस से ऊँचे स्थान पर होना चाहिए तथा गैस सिलेंडर जमीन से सटा हुआ नहीं होना चाहिए। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ध्यान ने देने का परिणामस्वरुप क्षतिग्रस्त विद्यालय सहित रसोई के अव्यवस्था से भी बच्चे व शिक्षक तथा शिक्षिका और रसोईयां भी दुर्घटना की जद में हैं।













