April 17, 2026 6:12 pm

RNI No : MPHIN / 2017 / 76083

best news portal development company in india

RNI No: MPHIN/2017/76083

वन क्षेत्र की अंधाधुंध पेड़ कटाई का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, जंगल पर कब्ज़ा कर काटे जा रहे हैं पेड़

अनूपपुर। जिले में आरक्षित वन भूमि पर बड़े पैमाने में हों रहे अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की निष्क्रियता और वन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगल की यह ज़मीन, जिसे सरकार द्वारा संरक्षित घोषित किया गया है। उस पर अतिक्रमणकारियों ने न केवल कब्ज़ा कर लिया है, बल्कि मनमानी पेड़ों की कटाई भी की जा रही है। यह कटाई सिर्फ पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचा रही, बल्कि उस पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रही है, क्योंकि वहाँ के जानवर हो या ग्रामीण, सभी इन्हीं जंगलों पर निर्भर हैं। इसके बावजूद, संबंधित सरकारी विभाग और अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हुए हैं।

वकील हाईकोर्ट की शरण में

इस मामले को उजागर करने वाले अनूपपुर निवासी अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत दास पटेल है। जिन्होंने खुद मौके पर जाकर हालात का जायज़ा लेते हुए इससे जुड़े दस्तावेज़ जुटाए। उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायतें भेजीं, लेकिन जब कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने इस मुद्दे को जनहित याचिका (PIL) के जरिये मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने रखा। उनकी याचिका एक आपदा का अलार्म है, जिसे अनदेखा करना आने वाली पीढ़ियों के लिए भयावह साबित हो सकता है।

अतिक्रमण की हुई पुष्टि

इस वन क्षेत्र में लगभग 1000 एकड़ पर अतिक्रमण कर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई चल रही है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर दो व्यक्तियों मदन पटेल और सदन पटेल के नाम प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इन दोनों ने वर्षों पहले जंगल की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर लिया था। इस दावे की पुष्टि वर्ष 2012 में वन विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में भी हुई, जिसमें बताया गया कि आरएफ 276 कंपार्टमेंट की 5.408 हेक्टेयर भूमि पर मदन पटेल का कब्ज़ा है। इसके बाद, 2018 में एक न्यायिक आदेश में भी यह पाया गया कि मदन और सदन पटेल आरक्षित वन भूमि पर कब्ज़ा किए हुए हैं। इन रिपोर्टों से यह साफ जाहिर होता है कि शासन और प्रशासन इस अतिक्रमण से भलीभांति परिचित हैं, बावजूद इसके कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया।

लोक कल्याण ट्रस्ट’ के नाम, फिर भी कब्ज़ा

अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने कोर्ट के सामने यह तथ्य भी रखा कि जिस ज़मीन पर यह अवैध कब्ज़ा किया गया है, वह ‘लोक कल्याण ट्रस्ट’ के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, यानी सरकारी रिकॉर्ड में भी यह साफ है कि भूमि निजी नहीं है। इसके बावजूद, अतिक्रमणकारी न केवल ज़मीन का उपयोग खेती और निर्माण के लिए कर रहे हैं, बल्कि पेड़ों की अवैध कटाई करके वन संपदा को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। इस क्षेत्र में न केवल कानून की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, बल्कि सरकार की संपत्ति पर भी कब्ज़ा जमाया जा रहा है। इस मामले में तहसीलदार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। तहसीलदार की भूमिका भी संदिग्ध है, जिससे शक होता है कि कहीं अधिकारी खुद इस अवैध कब्ज़े में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं। याचिका के जरिये उन्होंने कोर्ट से यह अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सज़ा दी जाए। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार किया और जवाब प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने आदेश देते हुए यह भी कहा कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक आरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार की पेड़ों की कटाई या नया अतिक्रमण नहीं किया जाए, सिवाय इसके कि वन अधिकारी द्वारा नियम अनुसार अनुमति दी गई हो। अगली सुनवाई 10 सितंबर 2025 को होगी।

Leave a Comment

और पढ़ें

Orpheus Financial

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!