April 17, 2026 6:09 pm

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हाईकोर्ट के आदेश की उड़ रही धज्जियाँ, पक्षीराज बस संचालक की मनमानी आई सामने

परिवहन एवं जिला प्रशासन की अनदेखी से बस संचालक बेखौफ
पुष्पराजगढ़।
शासकीय मॉडल सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पुष्पराजगढ़ में अध्यनरत विद्यार्थियों के विद्यालय आवागमन की सुविधा की दृष्टि गत निःशुल्क बस परिवहन सेवा में लगी महामाया ट्रेवल्स पक्षीराज बस सर्विस शहडोल के द्वारा अधिकारियों से आपसी साठगांठ कर अपने नाम टेण्डर पास कराकर निः शुल्क बस परिवहन सेवा के नाम छात्र छात्राओं के साथ नई बस की जगह पुरानी घिसीपिटी बसों को डेंटिंग पेंटिंग कराकर संचालित कर रहा है जिससे कभी भी कोई अप्रिय घटना घटने की आशंका है और परिवहन विभाग सहित जिला प्रशासन बस आपरेटर के खिलाफ कुछ भी कार्यवाही कर पाने से गुरेज कर जिला प्रशासन बस आपरेटर के आगे नतमस्तक हैं।
05 जनवरी 2018 को दिल्ली पब्लिक स्कूल निपानिया में एक सड़क हादसा हुआ था उक्त हादसे में बस बायपास पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में चार विद्यार्थियों और बस ड्राइवर की जान चली गई थी तो कही जिला प्रशासन उक्त घटना की पुनावृत्ति का इंतजार तो नहीं कर रहा हादसे के बाद अभिभावकों द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिसमे हाई कोर्ट ने उक्त पूरे मामले को संज्ञान में लेकर 12 वर्ष पुरानी बसो के संबंध में गाइडलाइन जारी कर किसी भी स्थिति में 12 वर्ष पुरानी बसें स्कूल में ना लगाने की शख्त हिदायत दी गई थी। परन्तु शासकीय मॉडल सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पुष्पराजगढ़ में नई बसो के नाम टेंडर लेकर उक्त बस संचालक पुरानी 2012-13 की 12 वर्ष पुरानी बसे जिनकी हालत बहुत ही खस्ता है जिन्हें महामाया (पक्षीराज) ट्रेवल्स द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से बच्चों की जान जोखिम में डाल कर उक्त पुरानी बसो को रंग रोहन कराकर बेखौफ सड़को पर दौड़ाकर हाई कोर्ट के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा कर नियम कायदों को ठेंगा दिखा रहा है। लगातार समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर को प्रशासन अनदेखी कर बस आपरेटर को अभयदान दिया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के इंदौर हाईकोर्ट में 07 वर्ष पूर्व डीपीएस में हुये हादसे के बाद दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था कोर्ट ने राज्य सरकार को 25 बिंदुओं पर अमल करने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों का मकसद स्कूल बसों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना था। जिसमे स्कूलों में लगी सभी बसो का सर्टिफिकेट होना जरूरी बताया इसके साथ ही बस का फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र और टैक्स के भुगतान का प्रमाण पत्र होना चाहिए। एवं कोर्ट ने फैसला सुनाते हुये शख्त निर्देश दिए गये थे की किसी भी विद्यालय में लगी कोई भी स्कूल बस 12 साल से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए।
स्कूल बसों के लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं। स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए। उस पर स्कूल बस या ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना ज़रूरी है। बस के आगे और पीछे स्कूल का नाम, पता और वाहन प्रभारी का मोबाइल नंबर 09 इंच के बोर्ड पर लिखा होना चाहिए। खिड़कियों पर जालीदार ग्रिल होनी चाहिए। शीशों पर रंगीन फिल्म या पर्दे नहीं लगाए जा सकेंगे। बस ड्राइवर के पास कम से कम 05 साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए। स्कूल को शपथ पत्र देना होगा कि बस खतरनाक तरीके से नहीं चलाई जाएगी। बस में स्पीड गवर्नर लगा होना ज़रूरी है। स्कूल-कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में चलने वाले वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस, कैमरे तथा पैनिक बटन लगाने होंगे। अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड किट भी अनिवार्य रखना होंगे। अगर कोई बस संचालक उक्त नियमों का पालन नहीं करता तो उस पर जुर्माना लगाकर वैधानिक कार्यवाही की जा सकती है।

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