April 17, 2026 4:48 pm

RNI No : MPHIN / 2017 / 76083

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आईजीएनटीयू में हुए विवाद पर झूठे एफआईआर का आरोप, शहडोल पुलिस महानिदेशक को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने एफआईआर निरस्त करने का सौंपा ज्ञापन

अमरकंटक। स्वतंत्रता दिवस के दिन IGNTU में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहा था। इसी दौरान दो गुटों के बीच धरना स्थल में मारपीट होने लगा। तथा उक्त मारपीट के मामले का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ। जिसके बाद मामला अमरकंटक थाने तक जा पहुंचा प्रथम पक्ष (पीड़ित) ने अपने साथ हुई मारपीट का मामला पंजीबद्ध कराया। वहीं द्वितीय पक्ष ने भी थाने में स्वयं को पीड़ित बताते हुए मामला पंजीबद्ध कराया। लेकिन अब प्रथम पक्ष का कहना है कि हमारे खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज की गई है।

यह यह मामला

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) में दिनांक 14 और 15 अगस्त, 2025 को एक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने का आयोजन किया गया था, जिसके लिए विधिवत अनुमति भी प्राप्त की थी। दिनांक 15 अगस्त, 2025 को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने, जो कि संदिग्ध शोधार्थी थे, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों भूमिनाथ त्रिपाठी, विकास सिंह, संतोष कुमार सोनकर और तरुण ठाकुर के उकसाने पर, जानबूझकर उपद्रव एवं अभाविप संगठन मंत्री और कार्यकर्ताओं से मारपीट की घटना को अंजाम दिया। इस घटना के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं, जो हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उनके द्वारा किए गए उपद्रव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। पुलिस प्रशासन भी मौजूद था।

ज्ञापन में भड़काऊ भाषण देने के आरोप

पुलिस महानिदेशक के ज्ञापन में एवीबीपी कार्यकर्ताओं ने खेद जताते हुए उल्लेख किया है कि घटना के बाद, स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में प्रोफेसर भूमिनाथ त्रिपाठी ने भड़काऊ भाषण दिया। उन्होंने उन असामाजिक तत्वों और छात्रों का महिमामंडन किया, जिन्होंने हमारे साथ मारपीट की थी। उनका यह कृत्य स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस उपद्रव को कराने में उनका पूरा समर्थन था।

महानिदेशक को सौंपे ज्ञापन में मुख्य मांग

हम पीड़ित पक्ष होते हुए भी, हमारे ही खिलाफ एक झूठी और निराधार एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। यह एफआईआर दुर्भावनापूर्ण और मनगढ़ंत है, जिसका एकमात्र उद्देश्य हमें परेशान करना और हमारे आंदोलन को दबाना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आप तत्काल हस्तक्षेप करें। हमारे खिलाफ दर्ज की गई झूठी एफआईआर को निरस्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें और उन संदिग्ध प्रोफेसरों भूमिनाथ त्रिपाठी, विकास सिंह, संतोष कुमार सोनकर और तरुण ठाकुर व छात्रों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर धाराएं बढ़ाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई करें, जिन्होंने इस उपद्रव को अंजाम दिया था।

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