April 17, 2026 4:32 pm

RNI No : MPHIN / 2017 / 76083

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“विकास के नाम पर मप्र में विनाश लीला” 15 लाख पेड़ काटने की तैयारी

खनन, सड़क, डेम, नहर के नाम पर 100 साल पुराने पेड़ों की सरकारी अनुमति से हरियाली की होगी सुनियोजित हत्या

“मध्यप्रदेश सरकार के वन विभाग और पर्यावरण अभियानों के तहत “वृक्षारोपण, जन-जन का अभियान, पौधा लगाएँ, जीवन बचाएँ, हरा भरा मध्यप्रदेश।” तथा “एक पेड़ माँ के नाम”
वर्ष 2024-25 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर मध्यप्रदेश सरकार ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को बड़े स्तर पर अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने करोड़ों पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन वहीं 15 लाख पेड़ काटे जाने पर भी सवालों के कटघरे में मप्र सरकार खड़ी हो गई। इसके अतिरिक्त राजधानी भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश में तमाम विकास प्रोजेक्ट के नाम पर लगातार हरियाली की अंधाधुंध कटाई होगी। इसमें नए पेड़ों से लेकर 50 से 100 साल तक पुराने हेरिटेज पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और प्रदेश की ऊर्जा राजधानी सिंगरौली समेत प्रदेशभर में साल 2026 में कुल मिलाकर करीब 15 लाख पेड़ों की बलि दी जानी है। विकास के नाम पर इन पेड़ों को काटने की अनुमति खुद सरकार ने दी है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि “मप्र में विकास के नाम पर अब विनाश लीला प्रारम्भ होगा।

मप्र में खराब (एक्यूआई) के बाद यह कैसा निर्णय

प्रदेश के अधिकतर शहरों में हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) लगातार खराब हो रही है, दूसरी ओर पेड़ों की बेतहाशा कटाई जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विकास से जुड़ी परियोजनाएं कई साल पहले बनना शुरू हो जाती हैं, तो उनसे प्रभावित होने वाले पेड़ों की कटाई और उसकी भरपाई के लिए होने वाले प्लांटेशन पर भी कई साल पहले से काम शुरू क्यों नहीं होना चाहिए, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को समय रहते कम किया जा सके और इसकी भरपाई की जा सके। पर्यावरणविद का तो यहां तक कहना है कि ये विकास के नाम पर सरकारी अनुमति से हरियाली की सुनियोजित हत्या है।

सिंगरौली कोल ब्लॉक

सिंगरौली कोल ब्लॉक में 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं तथा 5.70 लाख और काटने की तैयारी है। सिंगरौली कोल ब्लॉक के लिए 1397.54 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है। इनमें से 1335.35 हेक्टेयर में घना जंगल है। कोल ब्लॉक हासिल करने वाली कंपनी स्टाटेक की ओर से अब तक करीब 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। वन विभाग के मुताबिक 5 लाख 70 हजार पेड़ और काटे जाने का अनुमान है। सिंगरौली जिले के वर्किंग प्लान के मुताबिक धिरौली वन क्षेत्र में साल, सरई, सागौन, साजा, हल्दू, धावन, महुआ, कारी, कोसम, जामुन, बहेड़ा, हरा, धवई, आंवला समेत कई प्रजातियों के पेड़ों की बहुतायत है।

खंडवा खरगोन-1.25 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव

महू-खंडवा रेलवे लाइन का गेज परिवर्तन कर बाड गेज लाइन बनाई जानी है। फिलहाल मामला होल्ड पर है।

विदिशा-सागर-छतरपुर 25 हजार 377 पेड़ काटे

भोपाल कानपुर हाईवे का निर्माण चल रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा जंगल के बीच से होकर गुजर रहा है। हाईवे निर्माण के कारण 270 एकड़ फॉरस्ट एरिया पूरी तरह खत्म हो चुका है।

इंदौर-उज्जैन – सिक्सलेन के लिए 3000 पेड़ कटेंगे

इंदौर-उज्जैन रोड 6 लेन हो रहा है। एमपीआरडीसी मौजूदा सड़क के दोनों ओर चौड़ीकरण करेगा, जिसके लिए 3000 पेड़ कटेंगे। इधर इंदौर के रीगल चौराहे पर मेट्रो स्टेशन के लिए 1240 पेड़ काटने की तैयारी है।

भोपाल 10 लेन प्रोजेक्ट में काटे जाने हैं 7871 पेड़

अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट में सड़क को फोरलेन से अपग्रेड कर 10 लेन बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में करीब 7871 पेड़ काटे जाने हैं। इधर मप्र सड़क विकास निगम कोलार बायपास निर्माण करने जा रहा है। इसका भी काफी हिस्सा जंगल से होकर निकलेगा, जिसके लिए 4105 पेड़ काटे जाएंगे। बंगरसिया से भोजपुर तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए 488 पेड़ काटे गए हैं।

ग्वालियर 3000 कटे, 6700 और काटे जाएंगे

ग्वालियर के थाटीपुर रीडेसिफिकेशन योजना में 3 हजार से अधिक पुराने पेड़ काटे जा चुके हैं। 6700 पेड़ पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी और एनएचआई के छोटे प्रोजेक्ट में मिलाकर काटे जाएंगे। डेम, नहर, पावर प्लांट मंडला और डिंडौरी में 5 लाख 40 हजार से ज्यादा पेड़ कटेंगे। तथा सिंगरौली, मंडला-डिंडौरी में ही करीब 11 लाख पेड़ काटे जाएंगे।

इकोलॉजिकल बैलेंस बनाने वाले पुराने पेड़ काटने से बड़ा नुकसान

काटे जाने वाले पेड़ों में अधिकांश हेरिटेज ट्री हैं, जो 50 साल से पुराने हैं। इकोलॉजिकल बैलेंस बनाए रखने में इनका सर्वाधिक महत्व है। इनकी कार्बन सोखने की क्षमता सामान्य पेड़ों से कई गुना होती है। इसलिए कार्बन डाई ऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन रिलीज कर यही पेड़ वातावरण ताजगीयुक्त बनाते हैं। इन पेड़ों की संख्या घटने से आबादी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की सांद्रता घटती है और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।

अनूपपुर न्यूजोन प्राइवेट लिमिटेड काटेगा हजारों पेड़

पेड़ो की अंधाधुंध कटाई सिर्फ महानगर ही तक सीमित नहीं है बल्कि यह “विनाश लीला” अनूपपुर जिले के ग्राम रक्सा, कोलमी में भी होगा। जहाँ विकास की आड़ में न्यूजोन प्राइवेट लिमिटेड हजारों पेड़ काटेगी। हालांकि न्यूजोन प्राइवेट लिमिटेड का दावा है कि वह लाखों पेड़ लगाएंगे भी। लेकिन पर्यावरणविद का मानना है कि जहाँ हजारों पेड़ की कटाई होगी वहां के आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने में जल एवं वायु परिवर्तन होगा। तथा नए लगाए गए पेड़ पुराने प्राकृतिक जंगलो की परिस्थितिकी की बराबरी नहीं कर सकते हैं। ऐसे में प्रदेश भर में 15 लाख पेड़ कटने से आगामी ग्रीष्म ऋतु “गर्मी का मौसम” मध्यप्रदेश वासियों के लिए दुष्कर होगा।

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