अनूपपुर। कोतमा थाना क्षेत्र के ग्राम छुलहा में पुलिस की लापरवाही ने एक गरीब की जिंदगी छीन ली। 45 वर्षीय बहोरी साहू ने शनिवार को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। कारण साफ है, बहोरी ने 15 अगस्त को अपनी पत्नी के अवैध संबंधों और मारपीट की शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन कोतमा थाने ने मामले को हल्के में लेकर न FIR दर्ज की, न ही कार्रवाई की। आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे खुलेआम घूमते रहे। आखिरकार अपमान और अन्याय से टूटकर बहोरी ने मौत को गले लगा लिया।
परिजन बोले अब FIR हो तभी उतारेंगे

घटना के बाद पूरा गांव गुस्से से फट पड़ा। परिजनों और ग्रामीणों ने शव को उतारने से मना कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। “पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद” और “न्याय चाहिए” के नारे गांव में गूंज लगे। ग्रामीणों ने साफ कहा अगर पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई कर ली होती तो आज बहोरी जिंदा होता। हालात बिगड़ते देख मौके पर पूर्व विधायक सुनील सराफ, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मंगलदीन साहू और जनपद उपाध्यक्ष अभिषेक सिंह पहुंचे। उन्होंने भी प्रशासन पर सवाल उठाए और मृतक परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
पुलिस ने दिया FIR का भरोसा
गांव का माहौल बिगड़ता देख कोतमा थाना प्रभारी रत्नंबर शुक्ला, बिजुरी थाना प्रभारी विकास सिंह और रामनगर पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंचे। लेकिन यहां भी ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। भीड़ लगातार पुलिस को घेरकर जवाब मांगती रही। आखिरकार पुलिस ने जब आश्वासन दिया कि रामलखन त्रिपाठी और उसके बेटों पर FIR दर्ज की जाएगी, तब जाकर ग्रामीणों ने शव को उतारने और पोस्टमार्टम के लिए भेजने पर राजी हुए। इस घटना ने कोतमा पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 15 अगस्त को शिकायत होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई? इससे यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों की पहुंच इतनी मजबूत थी कि बहोरी के फंदे से लटक जाने तक पुलिस हाथ बांधकर बैठी रही? हालांकि उक्त मामले पर अभी पुलिस अधीक्षक इस मौत की जिम्मेदारी सीधे पुलिस पर नहीं डाली है? लेकिन ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई न होने से आहत बहोरी ने “पुलिस प्रशासन की नाकामी को उजागर किया है।













