April 18, 2026 12:28 pm

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आखिर क्यों दिया पद से इस्तीफ़ा?

जगदीप धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है. 12 दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि अगस्त 2027 में रिटायर होंगे, लेकिन अब स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से त्याग पत्र दे दिया है। इस्तीफे के पीछे की वजह कुछ और ही है जो सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। मैं सही समय पर रिटायर होऊंगा, 2027 में, अगर भगवान ने चाहा तो!’, ये लाइन जगदीप धनखड़ ने 12 दिनों पहले दिल्ली में स्थित जेएनयू यूनिवर्सिटी में एक प्रोग्राम के बोला था। हालांकि, सोमवार 21 जुलाई को उन्होंने उपराष्ट्रपति के तौर पर इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की ज्यादातर समय आलोचना किया करते थे और उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव तक लाया था, इस फैसले से चौंक गए। विपक्षी दलों का कहना है कि मामला कुछ और है, जो साफ नजर नहीं आ रहा। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद न तो सरकार की ओर से और न ही उपराष्ट्रपति के ऑफिस के तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया। जिससे राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू हो गया। बीजेपी के मंत्रियों की ओर से भी कुछ विशेष नहीं कहा गया। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो धनखड़ को कभी ‘किसान पुत्र’ और ‘प्रेरणादायक नेता’ कहे थे, उन्होंने इस्तीफे के 15 घंटे बाद इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर किया। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर बीजेपी के चुप्पी पर विपक्ष को मामला कुछ और लग रहा है। लेकिन इस बीच यह बात सत्य है कि जगदीप धनखड़ बीते कुछ समय से बीमार चल रहे थे और हाल में ही हृदय संबंधी समस्याओं का इलाज करवाया था। मानसून सत्र के पहले दिन ही उनके इस्तीफे न सबको चौंका दिया। एक विपक्षी दल के नेता ने तो कहा कि जब इस्तीफा ही देना था तो सत्र शुरू होने के पहले ही दे देते।

कितनों दिनों के अंदर होगा उपराष्ट्रपति चुनाव

संविधान में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति के पद को जल्द से जल्द भरना होगा. यानी इस पद पर चुनाव के लिए जितनी जल्दी हो व्यवस्था करनी होगी। संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड 2 के मुताबिक़, उपराष्ट्रपति के निधन, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से ख़ाली होने वाली जगह को भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराने का प्रावधान है। नियमों के मुताबिक़ सामान्य परिस्थितियों में अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव निवर्तमान उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति के 60 दिनों के भीतर करना होता है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल ख़त्म होने से पहले ही ये चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। लेकिन ये पद अगर उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफ़े या पद से हटाए जाने या दूसरे कारण से ख़ाली होता है, तो इसे भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराने की व्यवस्था की जाती है।

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